2025-11-29

उत्तराखंड समेत हिमालयी क्षेत्र में कई गुना बढ़ा भूकंप का खतरा, भारत के नए भूकंप मैप ने बढ़ाई देश की चिंता

रैबार डेस्क: आपदा के लिहाज से संवेदनशील उत्तराखंड और अन्य हिमालयी राज्यों के लिए एक चिंताजनक खबर है। शुक्रवार को भारत का एक नया सिस्मिक जोनेशन मैप जारी किया गया है, जिसकी कुछ तस्वीरें आपको भी डरा सकती हैं। इस मैप में देश के 61 फीसदी क्षेत्र को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है। जबकि उत्तराखंड समेत हिमालयी क्षेत्र को सबसे ज्यादा खतरे वाले जोन 6 मे रखा गया है। पहल ये क्षेत्र सेस्मिक जोन 5 में था।

इस नए मैप में देश भर में भूकंप से होने वाले खतरों की जानकारी दी गई है। नई मैपिंग के बाद देश के 61% हिस्से को अब मध्यम से लेकर हाई खतरे वाले जोन में दिखाया गया है। मैप में इस संशोधन को कई दशकों में भारत के सिस्मिक रिस्क में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने यह मैप जारी करते हुए कहा कि यह इस मॉडल में धरती की परतों की मोटाई, प्लेटों के टकराव का दबाव, फॉल्ट लाइन की सक्रियता, तरंगों की गति और संभावित अधिकतम भूकंप सहित कई वैज्ञानिक जानकारियों का उपयोग किया गया है। यही वजह है कि यह नया संस्करण पहले की तुलना में काफी अधिक विश्वसनीय और आधुनिक माना जा रहा है। जबकि पुराने मैप सिर्फ ऐतिहासिक भूकंपों और पुराने डेटा पर आधारित थे।

उत्तराखंड जोन 6 में

मैप में पूरे हिमालयी आर्क को पहली बार बने नए जोन-6 में शामिल किया गया है, जिसे सबसे अधिक खतरे वाला जोन माना गया है। यानी हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्य और पड़ोसी देश नेपाल सबसे ज्यादा खतरे में हैं। इस जोन में गुजरात के कुछ हिस्से और अंडमान निकोबार द्वीप भी हैं, जहां खतरा बरकरार है। हरियाणा, पूर्वांचल के कुछ हिस्से और नेपास से सटे बिहार के इलाकों को जोन 5 में रखा गया है। दिल्ली एनसीआर को जोन 4 में रखा गया है।

हिमालयी क्षेत्र पर किए गए नए भूगर्भीय अध्ययन यह दर्शाते हैं कि यहां की सतह भले शांत दिखाई दे, लेकिन इसके भीतर अत्यधिक दबाव लगातार सक्रिय रहता है। पहले इस पूरे क्षेत्र को दो अलग-अलग ज़ोन में बांट दिया गया था, जबकि वैज्ञानिकों का मानना था कि यह विभाजन भूकंपीय वास्तविकता को सही तरीके से नहीं दिखाता। नई रिपोर्ट यह साफ कर देती है कि हिमालय के भीतर मौजूद फॉल्ट लाइन अभी भी शक्तिशाली भूकंप पैदा करने की क्षमता रखती हैं, इसी वजह से इसे सबसे खतरनाक श्रेणी में शामिल किया गया है।

बरतनी होगी कई गुना सावधानी

इस नई मैपिंग से साफ संकेत मिलता है कि भविष्य की संरचनाओं और शहरों की प्लानिंग में अब कहीं अधिक सावधानी बरतनी होगी। इमारतों को भूकंपरोधी तकनीक से बनाना होगा। अस्पताल, विद्यालय, पुल, पाइपलाइन और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएँ इस तरह तैयार की जाएँगी कि बड़े भूकंप के बाद भी उनका संचालन बाधित न हो। भारी उपकरणों को सुरक्षित रूप से फिट करने और भवनों की मजबूती बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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