2026-01-19

2026 में नहीं होगी नंदा देवी राजजात यात्रा, सुरक्षा का हवाला देते हुए स्थगित, फैसले के विरोध में कुरुड़ में होगी महापंचायत

रैबार डेस्क:  हिमालयी महाकुंभ के नाम से मशहूर, 280 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा के आयोजन पर आपसी टकराव, सियासत और अहम हावी होता दिख रहा है। व्यवस्थाओं की कमी का हवाला देते हुए सितंबर 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है।ऐतिहासिक यात्रा को अब वर्ष 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद धार्मिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक ओर जहां राजजात समिति ने सुरक्षा और परंपरा का हवाला दिया है, वहीं दूसरी ओर पुजारियों और ग्रामीणों ने इसे आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।

नंदा देवी राजजात समिति ने बताया है कि सितंबर में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की आशंका और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। समिति अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि यात्रा अब वर्ष 2027 में आयोजित होगी। डॉ. कुंवर ने बताया कि नंदा राजजात-2026 स्थगित करने का ऐलान 23 जनवरी को नौटी गांव में होने वाले मनौती कार्यक्रम में किया जाएगा।

आयोजन टलने के पीछे मतभेत

सूत्रों की मानें तो, कुरूड़ और नौटी से नंदा राजजात/नंदाजात के शुभारंभ को लेकर हाल में मतभेद भरे थे। जिसके चलते आयोजन को टालने का फैसला लिया गया है। हालांकि समिति पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए ही लिया गया है।

Breaking: नंदादेवी राजजात स्थगित, अब 2027 में प्रस्तावित

कुरुड़ धाम के पुजारियों का विरोध

नंदा राजजात स्थगित करने के फैसले पर नंदा धाम कुरुड़ के पुजारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि नंदा देवी राजजात केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक है। इसे टालने का फैसला जनभावनाओं के विरुद्ध है और इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। कुरुड बंड डोली समिति के मुताबिक राजजात पर कोई व्यक्ति या समिति अकेले निर्णय नहीं ले सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां नंदा ही तय करेंगी कि यात्रा कब होगी। उनके अनुसार राजजात का निर्णय देवी की इच्छा और जनसहमति से ही मान्य होगा।

विरोध के बीच 19 जनवरी को कुरुड मंदिर में 484 गांवों के लोगों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मां नंदा को मंदिर में अवतरित किया जाएगा और परंपरागत विधि से देवी की इच्छा जानी जाएगी। इसी आधार पर यह तय होगा कि नंदा देवी राजजात 2026 में होगी या 2027 में।

कुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर निकाय का प्रस्ताव

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि नंदा देवी राजजात जैसे विशाल आयोजन के लिए एक अलग प्राधिकरण की जरूरत है. डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि सरकार को कुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर नंदा देवी राजजात प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे यात्रा का संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और व्यवस्थाओं का बेहतर समन्वय किया जा सकेगा।

प्रशासन ने जारी की अग्रिम राशि

राजजात को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन ने यात्रा मार्ग के सुधार और सुविधाओं के विकास के लिए 20 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी है। इस राशि से 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के मार्ग पर सड़क, पुल, विश्राम स्थल और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

आगे बड़ी चुनौती

इस वर्ष नंदा राजजात का स्थगित होना सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में उन्हें यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन इस बीच अचानक यात्रा स्थगित होने से सरकार को भी झटका लगा है। ये मुद्दा आस्था और प्रशासन के बीच संतुलन साधने की भी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर सुरक्षा और व्यवस्थाओं की बात है तो दूसरी ओर हजारों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना जुड़ी हुई है। आने वाले दिनों में कुरुड की बैठक और सरकार के रुख से ही इस ऐतिहासिक यात्रा का भविष्य तय होगा।

क्या है नंदा राजजात

नंदा देवी राजजात यात्रा देवी नंदा को उनके मायके से विदाई देने का उत्सव है। करीब 280 किलोमीटर लंबी यह यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलती है, जिसे हिमालयी महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी अगुवाई चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू करता है। चमोली के नौटी गांव से शुरू होने वाली यह यात्रा होमकुंड (रूपकुंड के पास) में समाप्त होती है। मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। यही खाडू यात्रा का अग्रदूत होता है, इसे मां नंदा का प्रतिनिधि माना जाता है।

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