2026-01-26

चार धामों में बैन होगी गैर हिंदुओं की एंट्री! मंदिर समितियों के फैसले पर सीएम धामी का ये बयान आया सामने

रैबार डेस्क:  हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने की मांग अब चार धाम तक पहुंच गई है। बदरी नाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने भी बदरी केदार समेत समिति के तमाम मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने का मन बनाया है। इसके लिए समिति जल्द ही बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव लाने वाली है। इसके अलावा गंगोत्री मंदिर समिति ने भी गंगोत्री धाम और शीतकालीन गद्दीस्थल मुखवा में गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध करने की बात कही है। इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सीएम ने कहा है कि सरकार संतों और समितियों के फैसलों में दखल नहीं देगी। उनके सुझावों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि 25 जनवरी को श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि आगामी समिति की बैठक में दोनों धामों और मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। रविवार को ही श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया कि गंगोत्री धाम और शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन रहेगा।  श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि इस निर्णय के अनुसार, धाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

सीएम धामी ने कहा….

इस पूरे मामल पर मीडिया से बात करते हुए सीएम धामी ने कहा है कि इन पवित्र स्थानों की देखरेख और व्यवस्था का जिम्मा हमेशा से विभिन्न धार्मिक संगठनों, तीर्थ सभाओं और हमारे पूज्य संत समाज के पास रहा है, और सरकार इसी परंपरा का सम्मान करती है। हमारा स्पष्ट मत है, जितने भी धार्मिक स्थल हैं, देवस्थान हैं, इन स्थानों को देखने वाले धार्मिक सगठनों के लोग हैं, हमारा पूज्य संत समाज है, हमने कहा है कि जो भी उनकी राय होगी उनके अनुसार सरकार आगे बढ़ेगी। पहले कुछ कानून भी बने हैं। उनका अभी अध्ययन कर रहे हैं, उन कानूनों के आधार पर आगे बढेंगे।  उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मंदिरों में किसे प्रवेश देना है और किसे नहीं इसका फैसला मंदिर का प्रबंधन खुद करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के फैसलों में सीधे तौर पर शामिल नहीं है और न ही वह इसे थोप रही है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह फैसला सरकार का नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमारा इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है, फैसला लेने में मंदिर समितियां खुद सक्षम हैं।’

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