2026-02-12

कोटद्वार के मोहम्मद दीपक को भारी पड़ा दुकानदार का साथ देना, 90% घट गई जिम मेंबर्स की संख्या, रोजी रोटी का संकट

रैबार डेस्क:  कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार का पक्ष लेना और बजरंग दल से भिड़ना जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। इस विवाद के बाद उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके व्यवसाय पर पड़ा है। दीपक कोटद्वार में ‘हल्क जिम’  चलाते हैं जहा पहले 150 के करीब सदस्य नियमित रूप से आते थे,। लेकिन इस विवाद के सामने आने के बाद अब जिम मेंबर्स की संख्याघटकर महज 15 रह गई है। लोग दीपक के जिम से किनारा कर रहे हैं।

बता दे कि 26 जनवरी को कोटद्वार में बाबा गारमेंट्स की दुकान में बजरंग दल ने हंगामा किया और दुकानदार पर दुकान का नाम बदलने का दबाव डाला। इसी दौरान वहां दीपक कुमार पहुंच गया और बजरंग दल के लोगों से भिड़ गया। दीपक ने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताते हुए दुकानदार का बचाव किया। जिसके बाद यह विवाद कोटद्वार से निकलकर देश में छा गया। यह विवाद 31 जनवरी को और बढ़ गया, जब बड़ी मात्रा में बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठन एक बार फिर से न सिर्फ बाबा गारमेंट्स की दुकान के आगे विरोध करने आए, बल्कि दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक के जिम के सामने भी आ खड़े हुए और पुलिस ने बीच बचाव किया। देशभर में दीपक के जज्बे की चर्चा होने लगी। दीपक रातों रात चर्चा में आ गए। लेकिन अब यही शोहरत उनके कारोबार के लिए मुसीबत बन गई है।

‘हल्क जिम’ के संचालक दीपक कुमार बताते हैं कि वो अब गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं। विवाद से पहले उनके जिम में 150 युवा रेगुलर जिम आते थे, उनके मेंबर थे। लेकिन कोटद्वार बवाल के बाद अचानक से ये संख्या घटकर महज 15 रह गई है। ऐसे में दीपक को महज 12 स 15 हजार की ही आमदनी हो पा रही है। दीपक कहते हैं कि जिम का मासिक किराया ही 40,000 रुपये है और ऊपर से घर के लोन की 16,000 रुपये की किस्त का बोझ भी उन पर है। वो बेटी की स्कूल फीस भरने में भी असमर्थ हैं। जिम में काम ठप होने के कारण अब घर का बुनियादी खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।

दीपक की मानें तो जब उसने स्थानीय युवाओं से जिम में न आने का कारण पूछा तो युवाओं ने बताया कि जिम में हुई घटना के कारण उनके माता-पिता उन्हें वहां भेजने से मना कर रहे हैं। युवा वहां से किनारा कर रहे हैं। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

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