आर्थिक, समाजिक सूचकांकों में उत्तराखंड की लंबी छलांग, जीवन प्रत्याशा बढ़कर 73 साल हुई, 6 हजार से ज्यादा होमस्टे खुले
रैबार डेस्क: 9 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र के लिए नियोजन विभाग द्वारा तैयार की गई आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाएगा। उससे पहले नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने प्रेस वार्ता कर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की जानकारियों को साझा किया। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से आगे बढ़ी है। वर्ष 2021-22 की तुलना में उत्तराखंड की जीएसडीपी में डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई है। प्रति व्यक्ति आय, उद्योग, स्टार्टअप और बिजली उत्पादन समेत अनेक क्षेत्रों में बड़ी प्रगति हुई है।
जीएसडीपी
वर्ष 2024–25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ हो गया है, जबकि वर्ष 2021–22 में यह लगभग ₹2.54 लाख करोड़ था। यानी तीन वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
पर कैपिटा इनकम
वर्ष 2021–22 में जहां प्रति व्यक्ति आय ₹1,94,670 थी, वहीं वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर ₹2,73,921 तक पहुंच गई है। यह संकेत है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ा है और आय के नए अवसर पैदा हुए हैं।
छोटे उद्योगों को बढ़ावा
राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र भी तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2021–22 में MSME इकाइयों की संख्या 59,798 थी, जो वर्ष 2024–25 में बढ़कर 79,394 हो गई है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2017 तक जहां राज्य में स्टार्टअप की संख्या लगभग शून्य थी, वहीं अब यह बढ़कर 1750 तक पहुंच गई है।
ऊर्जा प्रदेश
बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में बिजली उत्पादन 5157 मिलियन यूनिट से बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है, जबकि सौर ऊर्जा उत्पादन 439 मेगावाट से बढ़कर 1027 मेगावाट तक पहुंच गया है। सड़क और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है।
सोशल इंडीकेटर्स
सामाजिक संकेतकों में भी सुधार देखने को मिला है। मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स 9.7 प्रतिशत से घटकर 6.92 प्रतिशत हो गया है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में मातृ और शिशु मृत्य दर में आई कमी का भी उल्लेख है। साल 2022 में आईएमआर (Infant Mortality Rate) की स्थिति 22 (प्रति 1000 जन्म लेने वाले बच्चों पर) थी, जो साल 2025 में घटकर 20 रह गयी। साल 2022 में मातृ मृत्यु दर (MMR) की स्थिति 103 थी, जो साल 2025 में घटकर 91 रह गयी है। इन वजहों से उत्तराखंड में जीवन प्रत्याशा बढ़कर 71.7 साल से बढ़कर 73 साल हो गई है।
उत्पाकदता बढ़ी
कृषि और पर्यटन क्षेत्र भी राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। कृषि उत्पादकता में वृद्धि के साथ औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का क्षेत्र तेजी से बढ़ा है।
2022 में चावल और गेहूं के उत्पादन 28.23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, जो साल 2025 में बढ़कर 32.47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है
मेडिसिनल एवं एरोमेटिक प्लांट के उत्पादन का दायरा 2022 में 900 हेक्टेयर था, जो साल 2025 में बढ़कर 10,000 हेक्टेयर हो गया है।
दूध का उत्पादन 2022 में 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन था। ये साल 2025 में बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
साल 2022 में मछली का उत्पादन 7,325 टन प्रति ईयर था. ये साल 2025 में बढ़कर 10,487 टन प्रति ईयर पहुंच गया है।

टूरिज्म
पर्यटन क्षेत्र में होटल और होमस्टे की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 2022 की अपेक्षा होटलों और होमस्टे की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2022 में स्टार होटल्स के अलावा होटल्स की संख्या 8,225 थी, जो साल 2025 में बढ़कर 10,509 हो गई है। साल 2022 में होम स्टे की संख्या 3,935 थी, जो साल 2025 में बढ़कर 6,061 हो गयी है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रही है। अब चुनौती यह है कि इस विकास को संतुलित और समावेशी बनाया जाए, ताकि पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों तक इसका लाभ समान रूप से पहुंच सके।
