2026-07-02

अंकिता भंडारी केस: जांच में देरी पर सीबीआई कार्यालय में भारी बारिश के बीच जोरदार प्रदर्शन, तालाबंदी

रैबार डेस्क: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक दलों ने एक बार फिर से हुंकार भरी। गुरुवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले जन सरोकारों से जुड़े दर्जनों संगठनों ने सीबीआई कार्यालय देहरादून में तालाबंदी की औऱ भारी बारिश के बीच जोरदार प्रदर्शन किया।  

पुलिस प्रशासन ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर भारी बैरिकेडिंग कर महिलाओं और आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद आंदोलनकारी महिलाओं ने दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुंचकर वहां भी प्रतीकात्मक तालाबंदी कर दी। इस दौरान सीबीआई अधिकारी बाहर आए, लेकिन वे कार्यालय परिसर के अंदर ही मौजूद रहे और वहीं से आंदोलनकारियों के साथ वार्ता हुई। आंदोलनकारियों ने सीबीआई अधिकारियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल रखे और जांच की वर्तमान स्थिति पर जवाब मांगा। अधिकारियों के जवाबों से असंतुष्ट आंदोलनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर भी ताला जड़ दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा घोषित सीबीआई कार्यालय तालाबंदी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी हुई, जनगीत गाए गए और आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता न्याय यात्रा के दौरान जो संकल्प लिया गया था, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।

आंदोलनकारियों द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल:

1. आखिर अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP कौन है?

2. दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नाम सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई?

3. मुख्यमंत्री के आदेशों पर बुलडोजर कार्रवाई कर साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

4. बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्य मिटाने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

5. छह महीने बाद भी सीबीआई जांच में क्या प्रगति हुई?

6. क्या सीबीआई ने अब तक उर्मिला सनावर, रेनू बिष्ट एवं अन्य लोगों से पूछताछ की है?

7. अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया?

भारी बरसात के बीच मौजूद लोगों ने धैर्यपूर्वक वक्ताओं की बातें सुनीं। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की लड़ाई है।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और न्याय के लिए है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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