सुगम क्षेत्रों में तबादले के लिए कागजी तलाक ले रही महिला टीचर! मनचाही पोस्टिंग के लिए खेला जा रहा गजब खेल
रैबार डेस्क:शिक्षा विभाग में ट्रांसफर के लिए टीचर तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। अब तक आपने बामारी या सास ससुर की सेवा के बहाने ट्रांसफर लेने के मामले बहुत देखे होंगे लेकिन अब शिक्षिकाएं सुगम में तबादले के लिए कागज तलाक का सहारा ले रही हैं। हाल ही में 1500 से ज्यादा शिक्षकों के तबादलों हुए हैं जिनमें कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जिनमें तलाक के कागज लगाए गए हैं।
उत्तराखंड में तबादलों के लिए ट्रांसफर एक्ट लागू किया गया है। जिसमें रोटेशन के आधार पर शिक्षकों को सुगम क्षेत्र से दुर्गम और दुर्गम क्षेत्रों से सुगम में अनिवार्य रूप से तबादले किए जाते हैं। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों के लिए अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) के तहत पांच श्रेणियों में अनुरोध के आधार पर ट्रांसफर किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं, शिक्षक को गंभीर बीमारी, माता-पिता, सास-ससुर की बीमारी, तलाकशुदा, विधवा या विधुर होना भी तबादले के लिए आधार थे।
विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस एक्ट के प्रावधानों का कुछ शिक्षिकाओं ने मजाक बनाया है। मनचाही जगह पर तबादले के लिए उन्होंने पति से तलाक ले लिया। हद तो तब हो गई जब तलाक के बावजूद पति अपनी शिक्षिका पत्नी को स्कूल छोड़ने पहुंच रहे हैं, यानी उन्होंने केवल कागजी तलाक लिया।
यही नहीं, तलाक के कागज के आधार पर ट्रांसफर मिलने के बाद इन टीचर्स ने फिर से कोर्ट मैरिज कर ली। सूत्रों की मानें तो लंबे वक्त से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में नौकरी करने के बाद भी शिक्षिकाओं को सुगम इलाकों में तैनाती नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने अपने पति से कागजी तलाक का रास्ता अपनाया।
शिक्षामंत्री धन सिंह रावत के मुताबिक विशेष अनुरोध के आधार पर सुगम क्षेत्रों में ट्रांसफर के लिए कई श्रेणियां बनाई गई हैं, मसलन किसी को किडनी या कैंसर जैसी गंभीर बीमारी है, किसी के पति या सास ससुर को गंभीर बीमारी है, कोई तलाकशुदा महिला है या एकल महिला है। उनकी परेशानियों को देखते हुए ट्रांसफर किए जाते हैं। शिक्षामंत्री ने कहा कि इन सभी मामलों में अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं, अगर कोई तलाक के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर लेने का केस सामने आता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
