बिगड़ती कानून व्यवस्था के विरोध में कांग्रेस का पुलिस मुख्यालय घेराव, तीखी नोंकझोंक, उग्र आंदोलन की चेतावनी
रैबार डेस्क: राज्य की ध्वस्त कानून व्यवस्था के विरोध में आज उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पुलिस मुख्यालय का घेराव किया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी बैरिकेटिंग पार करते हुए पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गए। और सरकार को चेतावनी दी कि यदि कानून व्यवस्था जल्द पटरी पर नहीं आई और लगातार हो रही हत्याओं पर लगाम नहीं लगी तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। इस दौरान कांग्रेस नेताओं की पुलिस के साख नोंकझोंक भी हुई।
पुलिस मुख्यालय घेराव कार्यक्रम में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत भी शामिल हुए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालते हुए पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा और उत्तराखंड में दिन-दहाड़े हो रहे हत्याकांडों एवं बिगड़ती कानून व्यवस्था पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि विगत कुछ समय से राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जनपदों में दिन-दहाड़े घटित हो रही हत्या एवं गंभीर आपराधिक घटनाओं से आमजन में भय और असुरक्षा का वातावरण व्याप्त है। देवभूमि कहे जाने वाले राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने नागरिकों के विश्वास को प्रभावित किया है और अपराधियों में कानून का भय समाप्त होता प्रतीत हो रहा है।
बैरिकेडिंग पर हुई भिड़ंत
पुलिस ने मुख्यालय से काफी पहले ही भारी बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान जोश में आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था अत्यंत चिंताजनक स्थिति में है तथा पिछले 15 दिनों के भीतर राजधानी देहरादून सहित विभिन्न जिलों में दिन-दहाड़े 5 जघन्य हत्याकांड हुए हैं। इन घटनाओं में शामिल सभी अपराधियों की गिरफ्तारी न होना गंभीर चिंता का विषय है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मांग की कि प्रदेश के संवेदनशील एवं अपराध-प्रवण क्षेत्रों में विशेष पुलिस अभियान चलाया जाए, संगठित अपराध एवं हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, प्रत्येक गंभीर आपराधिक घटना की समयबद्ध एवं उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित की जाए तथा पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय कर लापरवाही पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
