2026-11-05

ऑटिस्टिक बच्चों की यात्रा को लाखों परिवारों की उम्मीद में बदला, अनीता शर्मा को मिलेगा उत्तराखंड गौरव सम्मान

रैबार डेस्क: उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के लिए अपना विशेष योगदान देने वाले 15 महानुभावों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया जाएगा। उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 हेतु चयनित महानुभावों को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में ये पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस दौरान ऑटिज्म और समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली अनीता शर्मा थपलियाल को भी उतत्राखंड गौरव सम्मान से नवाजा जाएगा।

जिन महानुभावों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उनमें राजनीतिक एवं शासकीय क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी (मरणोपरांत), चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु डॉक्टर जीवन सिंह तितियाल, उद्यमिता हेतु श्री मनमोहन भारद्वाज, फिल्म जगत से श्रीमती हिमानी शिवपुरी, लोक जागर गायिका श्रीमती हेमा नेगी करासी, शिक्षा एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में डॉक्टर गिरीश रंजन तिवारी, सामाजिक क्षेत्र में सुश्री अनीता थपलियाल शर्मा, श्री कश्मीर सिंह, पर्यावरण के क्षेत्र में पर्यावरणविद श्री सुरेश भाई, लोक गायिका श्रीमती रेशमा शाह के साथ ही खेल के क्षेत्र में सुश्री एकता बिष्ट, सुश्री वंदना कटारिया, सुश्री अंकिता ध्यानी, सुश्री निकिता चंद एवं श्री कपिल पोखरिया, शामिल हैं।

2 ऑटिज्म पीड़ित बच्चों की मां अब बदल रही सैकड़ों बच्चों की जिंदगी

अनीता थपलियाल शर्मा को भी स्थापना दिवस के दिन उत्तराखंड गौरव सम्मान से नवाजा जाएगा। मूल रीप से पौड़ी जनपद की रहने वाली अनीता शर्मा की जिंदगी संघर्षों में तपकर आगे बढ़ी है और आज वे लाखों बच्चों के लिए नई प्रेरणा बनकर खड़ी हैं।

अनीता अमेरिका में अराम की जिंदगी जी रही थी, लेकिन जब उनके दोनों बच्चे ऑटिज्म पीड़ित हुए तो इससे उके जीवन की राह बदल गई। उन्होंने न सिर्फ दोनों बच्चों को अच्छी तरह संभाला बल्कि ऑटिज्म से जूझ रहे ऐसे तमाम बच्चों के लिए संघर्ष करना ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया। अनीता थपलियाल शर्मा, एक मां, ऑटिज्म एजुकेटर और एडवोकेट हैं, जिन्होंने अपने बच्चों की यात्रा को लाखों परिवारों के लिए उम्मीद और प्रेरणा में बदल दिया।

30 साल तक अमेरिका में ऑटिज्म के क्षेत्र में काम करने के बाद अनीता शर्मा रिवर्स माइग्रेशन करके भारत लौटी और अपनी मातृभूमि उत्तराखंड से एक नेक मिशन में जुट गईं। उन्होंने डॉ निशांत नवानी के साथ मायरा केयर सेंटर की स्थापना की जहां सैकड़ों ऑटिस्टिक या विशेष जरूरतों वाले बच्चों की देखभाल की जाती है, उनके स्किल्स को निखारा जाता है। अब उनका मिशन है, उत्तराखंड के सैकड़ों बच्चों को ऑटिज्म से बाहर निकालना और उनको सामान्य जीवन जीने के लिए प्रेरित करना।  

अनीता मानती हैं कि हर बच्चा अलग होता है, उसकी सीखने की क्षमताएं औऱ जरूरतें भी अलग होती हैं, इसलिए हर बच्चे को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता। इसलिए समावेशी शिक्षा के कॉन्सेप्ट को मजबूती देने के लिए उन्होंने देहरादून से शाइन अवी इनक्लूशिव एजुकेशन मिशन शुरू किया है। शाइन अवी पब्लिकेशन ऐसे विशेष बच्चों के लिए 150 से ज्यादा विजुअल-आधारित पुस्तकों के जरिए उन्हें  आत्मनिर्भर बनाने के मिशन में जुटा है।

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