उत्तराखंड में धधके जंगल! 100 दिन में वनाग्नि की 394 घटनाएं, मंत्री बोले स्थिति नियंत्रण में
रैबार डेस्क: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के बीच फायर सीजन वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वनाग्नि के संबंध में प्रेस वार्ता करते हुए स्थिति स्पष्ट की। विभाग से मुली जानकार के मुताबिक इस साल अब तक वनाग्नि की 394 घटनाएं हुई हैं जो पिछले साल के मुकाबले कम हैं।
वनमंत्री ने बताया कि वनाग्नि से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। 15 फरवरी से 25 मई तक प्रदेश भर में वनाग्नि की 394 घटनाएं घटित हुई हैं जिनमें 331.12 हेक्टर वन भूमि प्रभावित हुई है। आग बुझाते हुए हादसों में एक फायर वॉचर की मौत हुई है। सबसे अधिक गढ़वाल रीजन में 285 वन अग्नि की घटनाएं हुई हैं, कुमाऊं रीजन में 74 बनाने की घटनाएं हुई हैं जबकि वाइल्ड लाइफ रीजन में 35 वन अग्नि की घटनाएं हुई हैं।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी दी कि वन विभाग के कर्मचारी समेत 5600 से अधिक फायर वाचर प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं। विश्वभर में तापमान में बढ़ोतरी होने के कारण वनाग्नि की समस्या और घटनाएं अत्यधिक इन दोनों देखने को मिल रही है।
वन मंत्री ने कहा कि वनाग्नि नियंत्रण में जनसहभागिता सबसे जरूरी है। शीतलाखेत औऱ जड़धार गांव के म़ॉडल इसके बेहतर उदाहरण हैं। वन विभाग का सबसे बड़ा फोकस कम्युनिटी पार्टिसिपेशन है, ये तभी संभव है जब जनता फ्रेंडली पॉलिसी बनेगी। पिछले 4 सालों के भीतर वन विभाग ने जनता फ्रेंडली 12 से अधिक पॉलिसी बनाई हैं, जिससे लोगों की आजीविका बढ़े।
उनियाल ने कहा कि वन विभाग द्वारा पर्सनल प्रोटेक्टिव गियर्स, कस्टमाइज्ड फोर व्हीलर विथ वाटर टैंकर, कम्युनिकेशन इक्विपमेंट और फायर टूल्स खरीदे जा रहे हैं। उत्तराखंड में 13000 से अधिक फायर लाइन बनाई गई हैं इसके साथ चीड़ और पीरुल एकत्रीकरण की मदद से जहां गांव के स्थानीय लोगों को रोजगार रहा है, वहीं, इससे वनाग्नि की समस्या को भी रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
10 साल में 35 मौतें, 26 हजार हेक्टेयर जंगल खाक
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते 10 वर्षों में प्रदेश में वनाग्नि की कुल 14,638 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में 23,682.77 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। आग की वजह से अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 76 लोग घायल हुए हैं।
