2026-06-01

वनाग्नि की लपटें कम हुई लेकिन डीएफओ की धमकी के घाव हरे रहेंगे, डीएफओ ने ग्रामीणों को कहा था, मुकदमा कर दूंगा

रैबार डेस्क:  बीते दिनों प्री मानसून बरसात होने से वनाग्नि की घटनाओं में कुछ हद तक कमी आई है, लेकिन अधिकारियों के कुछ गैर जिम्मेदाराना बयान ऐसे हैं जो लोगों को हमेशा चुभते रहेंगे। चमोली में वन विभाग वनाग्नि को नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम दिखा, और डीएफओ उल्टा ग्रामीणों को ही धमकाने लगे कि अगर आग बुझाने में सहयोग नहीं किया तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर देंगे।

वनाग्नि ने चमोली जिले में भीषण तांडव दिखाया। सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गए। पहले एक फायर वॉचर की मौत हुई और फिर जंगल की आग ने एक महिला की भी जान ले ली। वन विभाग को जब कुछ नहीं सूझ तो डीएफओ साहब ग्रामीणों पर मुकदमे की धमकी देने लगे। गोपेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार दुबे ने पिछले दिनों जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगी आग की स्थिति, उसके कारण और रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा को लेकर बैठक की।

डीएफओ ने रेंज अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी लेते हुए आग की घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग की सूचना मिलते ही विभागीय टीम लगातार मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन आग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग बेहद जरूरी है।

डीएफओ ने सभी रेंज अधिकारियों को निर्देश दिए कि आग बुझाने में वन विभाग का सहयोग नहीं करने वाले ग्रामीणों के विरुद्ध वन अधिनियम की धारा-79 के तहत कार्रवाई करें। दोषी पाए जाने पर इसमें एक वर्ष तक की सजा और जुर्माने का भी प्रविधान है। डीएफओ ने कहा कि जंगलों में लग रही आग वन संपदा के साथ वन्यजीव और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। ऐसे में वन विभाग के साथ ही स्थानीय लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे जंगलों को आग से बचाने में सक्रिय सहयोग करें।

मतलब अपनी नाकामी का ठीकरा डीएफओ ग्रामीणों के ऊपर फोड़ रहे हैं। कहन की जरूरत नहीं कि जब वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्रामीणों के अधिकारों, वन उपज के उपयोग और पारंपरिक हक़ों की बात आती है तब वन विभाग तमाम तरह के रोड़े अटकाता है। हेलंग में घस्यारियों पर की गई जोर जबरदस्ती की तस्वीरें किसी से छिपी नहीं हैं। लेकिन जंगलों में आग बेकाबू होने लगी तो विभाग ने पल्ला झाड़ते हुए सारा दायित्व ग्रामीणों पर डाल दिया।

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