2026-09-20

‘जब चीनी सेना ने हमें हिरासत में ले लिया था’…राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सुनाया 20 साल की उम्र का वो किस्सा

रैबार डेस्क: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने करियर का रोचक किस्सा सुनाया उन्होंने बताया कि एक युवा अधिकारी के तौर पर अपनी पोस्टिंग के समय एक बार उनके साथियों को चीन कीसेना पकड़ कर ले गई, वे लौटकर नहीं आए कतो मुझे लगा कि अब बस मेरा करियर खत्म हो गया।  उन्होंने बताया कि उस मुश्किल दौर में क्या हुआ और कैसे हालात बदले।

चीन बॉर्डर पर तैनाती की कहानी बताई

शनिवार को दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे एनएसए अजीत डोभाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि वह उस समय 20 साल के थे। और इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए थे। सिक्किम में उन्हें खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी मिली थी। मेरी जिम्मेदारी में बॉर्डर वाले इलाकों की देखभाल करना और PLA की हलचल, चीनी सेना की गतिविधियों, चीनी परंपराओं और इन सबके बारे में इंटेलिजेंस इकट्ठा करना भी शामिल था, जो मेरे काम और इंटेलिजेंस ब्रीफ का हिस्सा था।’

NSA ने बताया, ‘हमने एक ऑपरेशन के लिए बॉर्डर वाले इलाके में एक इंटेलिजेंस मिशन भेजा था। उन्हें पांच या छह दिन बाद वापस आना था…पांच दिन बीत गए, वे लोग नहीं आए। दस दिन बीत गए। फिर दस दिन और बीत गए। मेरे लिए यह बहुत चिंता की बात थी, न सिर्फ पेशेवर तौर पर, बल्कि मानवीय नजरिए से भी… लेकिन मुझे हेडक्वार्टर से फोन आया। और मेरे बॉस ने मुझे बताया कि वे अब चीनी हिरासत में हैं। शायद कोई बातचीत, या नेगोशिएशन, या कोई डील हुई होगी। इसलिए वे वापस आ गए।’

https://x.com/ANI/status/2101202232159162773?s=20

ज़िंदगी बस एक सवाल है…

डोभाल ने छात्रों को बताया कि उस समय उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया। वह अभी 20 की उम्र में ही थे और उन्हें लगा कि अब उन्हें अपने लिए कोई दूसरा करियर तलाशना पड़ेगा। लेकिन मामले की जांच पूरी हो गई। मुझमें कोई गलती नहीं पाई गई, शायद मैंने सब कुछ सही किया था। लेकिन फिर भी मैं बहुत दुखी था। मेरा एक साथी था, एक बूढ़ा तिब्बती शेरपा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो का सदस्य था और मेरे साथ काम करता था, उसने कहा कि यह सब मैप रीडिंग की बात है, ज़िंदगी बस एक सवाल है, कुछ लोग अपनी मैप रीडिंग सही कर लेते हैं; दूसरे गलत कर लेते हैं।’

अपने इस अनुभव के जरिए डोभाल ने छात्रों को यह भी बताया कि करियर के कठिन दौर में किसी घटना को अंतिम पड़ाव मान लेना जरूरी नहीं है। उनका खुद का अनुभव बताता है कि जिस घटना को उन्होंने कभी अपने करियर का अंत समझ लिया था, वह उनके जीवन की आगे की यात्रा को रोक नहीं सकी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed