राजस्व कर्मचारियों को गिरफ्तार करने पहुंची विजिलेंस टीम, तहसील में पूरी रात रही बंधक, 20 घंटे बाद बैरंग लौटी
रैबार डेस्क: उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। उत्तराखंड में ये कहावत हू ब हू चरितार्थ हुई जब बुधवार को कथित रिश्वतखोरी के मामले में विजिलेंस की टीम छापा मारने तहसील पहुंच गई। लेकिन तहसील कर्मचारियों ने विजिलेंस की टीम को ही बंधक बना लिया। करीब 20 घंटे के हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद ये मामला गुरुवार को एसडीएम के दखल के बाद समाप्त हो गया।
दरअसल एक किसान की शियकायत पर विजिलेंस टीम ने बुधवार को तहसील परिसर में कार्रवाई की और तहसील में कार्यरत वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और संग्रह अमीन को कथित रिश्वत लेने के आरोप में हिरासत में लिया था। कार्रवाई की सूचना मिलते ही तहसील कर्मचारी आक्रोशित हो गए और उन्होंने तहसील परिसर में धरना शुरू कर दिया। कर्मचारियों के विरोध के चलते विजिलेंस टीम करीब 20 घंटे तक तहसील परिसर में ही फंसी रही। इस दौरान पूरे परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। जिलेभर से राजस्व कर्मचारी भी सितारगंज पहुंच गए, जबकि वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा के गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण भी आंदोलन में शामिल और रातभर हंगामा चलता रहा।
करीब 20 घंटे तक चले गतिरोध के बाद विजिलेंस टीम ने हिरासत में लिए गए वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और संग्रह अमीन को मुक्त कर दिया। इसके बाद भारी पुलिस सुरक्षा के बीच विजिलेंस टीम तहसील परिसर से बिना दोनों कर्मचारियों को साथ लिए लौट गई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। गुरुवार सुबह उपजिलाधिकारी तुषार सैनी तहसील पहुंचे और राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारी नेताओं तथा विजिलेंस टीम के अधिकारियों के साथ वार्ता की। लंबे मंथन और उच्चाधिकारियों से हुई बातचीत के बाद गतिरोध समाप्त हुआ। इसके बाद विजिलेंस टीम ने दोनों कर्मचारियों को छोड़ दिया और पुलिस सुरक्षा के बीच तहसील परिसर से रवाना हो गई।

एसडीएम तुषार सैनी ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने विजिलेंस टीम को स्पष्ट किया कि जिस धनराशि को रिश्वत बताया जा रहा था, वह राजस्व विभाग की वैधानिक ऋण वसूली प्रक्रिया के तहत प्राप्त की गई राशि थी। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण कार्रवाई को अलग दृष्टिकोण से देखा गया।
उधर विजिलेंस की कार्रवाई के विरोध में राजस्व कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। राजस्व कर्मचारी संयुक्त परिषद सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर विजिलेंस की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि राजस्व वसूली की नियमित एवं वैधानिक प्रक्रिया को रिश्वतखोरी का मामला बताकर कर्मचारियों की छवि धूमिल की जा रही है। उनका आरोप है कि बिना सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच किए कार्रवाई किए जाने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच पूरी होने से पहले कर्मचारियों के खिलाफ गिरफ्तारी या अन्य विधिक कार्रवाई की गई तो जिलेभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

बकाया राशि की वसूली
राजस्व कर्मचारियों की मानें तो बुधवार करीब 3:45 बजे तहसील सितारगंज के वसूली कक्ष में संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और सहायक राजस्व लेखाकार भूपेंद्र सिंह राणा राजस्व बकायेदार अवतार सिंह से सरकारी बकाया राशि की वसूली कर रहे थे। यह कार्रवाई सक्षम अधिकारी द्वारा जारी रिकवरी प्रमाणपत्र के आधार पर कलेक्शन मैनुअल की धारा 127 के प्रावधानों के अनुरूप की जा रही थी।
