Aipan Art promotion

रैबार डेस्क : उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण (Aipan Art Uttarakhand) कलाकृति को नया आयाम मिल रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) ने हालिया दिल्ली दौरे पर केंद्रीय मंत्रियों को ऐपण कलाकृति भेंट कर ऐपण को नया जीवन दिया है। सीएम ने अपने दफ्तर की नेमप्लेट भी ऐपण कला में लगवाई है। इस पहल के बाद ऐपण कला से जुड़ी बेटियों को नई आस जगी है।

सीएम त्रिवेंद्र के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट के मुताबिक ऐपण को नई पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने सराहनीय प्रयास किए हैं। रमेश भट्ट खुद भी अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में ऐपण पर काम कर रही बेटियों से रूबरू हो चुके हैं। ऐपण पर बने उनके वीडियो को फेसबुक पर लाखों लोग देख चुके हैं।

रमेश भट्ट बताते हैं कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने ऐपण को प्रोत्साहन देने में खासी रुचि दिखाई है। सीएम ने अपने दफ्तर की नेमप्लेट भी ऐपण में बनवाई है और सभी मंत्रियों व अफसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया है।

रमेश भट्ट बताते हैं कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने ऐपण को प्रोत्साहन देने में खासी रुचि दिखाई है। सीएम ने अपने दफ्तर की नेमप्लेट भी ऐपण में बनवाई है और सभी मंत्रियों व अफसरों को ऐसा करने के लिए प्रेरित किया है। सीएम अल्मोड़ा में ऐपण प्रदर्शनी के दौरान कई बेटियों से मुलाकात कर चुके हैं जो ऐपण को अपनी आजीविका से जोड़ रही हैं। अब पिछले दिनों दिल्ली दौरे पर सीएम त्रिवेंद्र ने केंद्रीय मंत्रियों को एक के बाद एक ऐपण गिफ्ट देकर मजबूत सांस्कृतिक संदेश दिया है। रमेश भट्ट ने उम्मीद जताई है कि ऐपण को विश्वव्यापी पहचान दिलाने में ये प्रयास कारगर साबित होंगे। साथ ही प्रधानमंत्री जी के वोकल फ़ॉर लोकल के संकल्प को साकार करके रोजगार सृजन में भी सहायक होगा।

क्या है ऐपण

ऐपण कुमाऊँ की एक समृद्ध और गरिमापूर्ण रंगोली परंपरा है, जिसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। ऐपण शब्द संस्कृत के शब्द ‘अर्पण’ से लिया गया है, ‘ऐपण’ का शाब्दिक अर्थ ‘लिखना’ होता है। ऐपण हमारे हर त्योहारों, शुभ अवसरों, धार्मिक अनुष्ठानों और नामकरण संस्कार, विवाह , जनेऊ आदि जैसे पवित्र समारोहों का एक अभिन्न अंग है। इस तरह के सभी कार्यों की शुरुआत ऐपण बनाने से की जाती है।
ऐपण फर्श, दीवारों और घरों के प्रवेश द्वार, पूजा कक्ष और विशेष रूप से देवताओं के मंदिर को सजाने के लिए बनाये जाते है। इन डिजाइनों का उपयोग लकड़ी की चौकी (देवताओं के लिए पूजा आसन) को पेंट करने के लिए भी किया जाता है। विभिन्न अवसरों और अनुष्ठानो के आधार पर, विभिन्न प्रकार की चौकिया बनाई जाती हैं।

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