2026-09-01

टीचर कैपेसिटी बिल्डिंग पर ShineAvi का सेमिनार, फ्यूचर टीचर को बताया, विशेष जरूरतों वाले बच्चों को कैसे पढ़ाएं

रैबार डेस्क:  विशेष जरूरतों वाले बच्चों को सिखाने के लिए क्या तरीका अपनाया जाए औऱ क्लासरूम में उन्हें अन्य सामान्य बच्चों के बराबर कैसे लाया जाए, इस विषय पर शाइन अवी लर्निंग लगातार जागरुकता कार्यक्रम करता रहा है। इसी कड़ी में डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून कॉलेज में बीएड और डीएलएड अभ्यर्थियों के साथ टीचर कैपेसिटी बिल्डिंग सेमिनार आयोजित किया गया।

ऑटिस्टिक लोगों के अधिकारों, उनकी ज़रूरतों और समाज में उनकी स्वीकृति के लिए लंबे समय से आवाज़ उठा रही अनीता शर्मा ने सेमिनार में बताया कि भविष्य के शिक्षक कैसे समावेशी शिक्षा के उद्देश्य को पूरा करने के लिए काम कर सकते हैं। इस सेशन का मकसद भविष्य के शिक्षकों को यह समझाना था कि हर क्लासरूम में अलग-अलग तरह से सीखने वाले बच्चे होते हैं। कुछ बच्चों को भाषा समझने, बात समझने, ध्यान देने, बातचीत करने, व्यवहार या पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी स्किल्स में दिक्कतें हो सकती हैं। एक संवेदनशील और ध्यान देने वाला शिक्षक इन शुरुआती संकेतों को पहचान सकता है और क्लासरूम में सही मदद दे सकता है।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

* अलग-अलग तरह से सीखने की ज़रूरतों वाले बच्चों को कैसे पहचानें

* बच्चे के प्रति सिंपैथी, धैर्य और एक्सेपटेंस की भावना का महत्व

* करिकुलम और क्लासरूम के मानकों और दिशानिर्देशों में कैसे बदलाव करें

* बच्चे की क्षमताओं के हिसाब से उसके मूल्यांकन के तरीके को कैसे बदलें

* बच्चे को ऑब्ज़र्व करने और उसकी सही स्थिति का पता लगाने के बीच का अंतर क्या होता है

* माता-पिता, स्पेशल एजुकेटर्स और थेरेपिस्ट के साथ कब और कैसे मिलकर काम करें

अनीता शर्मा, जो खुद दो ऑटिस्टिक बच्चों की मां हैं, उन्होंने अपने 40 साल के अनुभवों को शाइन अवी किताबों में समेटा है। ये खास तरह की किताबें विजुअल आधारित हैं। यानी बच्चे तस्वीरों के आधार पर अनुमाल लगाकर सीख सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे ऑटिस्टिक बच्चों के डॉक्टर बन जाएं या उनकी स्थिति का पता लगा सकें, लेकिन  टीचर ऐसे पहले व्यक्ति हो सकते हैं जो बच्चे की मुश्किलों को नोटिस कर सकते हैं, उनकी खूबियों को समझ सकते हैं, और अगर कहीं कोई गैप नजर आता है तो उसे दूर करने में बच्चे की मदद कर सकते हैं।

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