पहाड़ी शैली में बनेंगे सरकारी भवन, पर्वतीय शिल्पकला के पुनरुद्धार के लिए CM का खास प्लान

रैबार डेस्क: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (CM Trivendra Singh Rawat) ने उत्तराखंड की पर्वतीय शिल्पकला, भवन निर्माण कला (Uttarakhand architecture) को नया जीवन देने की पहल की है। सब कुछ ठीक रहा तो राज्य में सभी विभागों के भवन पहाड़ी शैली से बने नजर आएंगे। सीएम ने कहा है कि
पहाड़ की शिल्प कला को पुनर्जीवित करने के लिए सरकारी भवन पहाड़ी शैली में बनाए जाएंगे।

सीएम त्रिवेंद्र पर्वतीय लोककला और शिल्पकला से खासा लगाव रखते हैं। पहाड़ी उत्पादों को प्रोत्साहन के साथ सीएम पहाड़ी शिल्पकला के लिए भी गंभीरता से सोचते हैं। शनिवार को सीएम पौड़ी जनपद में विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान सीएम ने कहा कि मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहे शहरों में पहाड़ी शैली से बन रहे भवनों को एक अन्य फ्लोर बनाने की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इस फ्लोर के लिए नक्शे का शुल्क नहीं लिया जाएगा, बशर्ते कि इसमें पर्वतीय शिल्पकला का उपयोग हुआ हो। सीएम ने कहा कि सरकार लोक कलाओं को संरक्षण देने के साथ ही पहाड़ की शिल्प कला को भी पुनर्जीवित करेगी। सरकारी भवनों को पहाड़ी शैली में निर्मित किया जाएगा। सीएम ने चिंता जताई कि पर्वतीय क्षेत्रों में भवन निर्माण में पत्थरों का कार्य अब लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है। इस कला को विलुप्त नहीं होने दिया जायेगा। सभी विभागों में भवन निर्माण में 20% पत्थरों का उपयोग होगा। इस तरह पत्थर के कलाकारों को काम मिलेगा और पहाड़ी भवन निर्माण कला भी जीवित रहेगी।

पहाड़ी शैली में बना एक भवन

सीएम ने कहा कि पहाड़ में भवन निर्माण की पुरानी शैली अब देखने को नहीं मिलती। लिहाजा इस कला को संरक्षण देने की जरूरत है। अब गांवों में भी मकानों में पत्थर की बजाए ईट का प्रयोग बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मैं ईट के इस्तेमाल का विरोधी नहीं हूं, लेकिन पहाड़ी शैली को जिंदा रखना होगा।’ पहाड़ी शैली हमारी पहचान है भवन को देखकर लगना चाहिए कि यह उत्तराखंड राज्य का भवन है।

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