2026-05-21

चमोली में आग बुझाते हुए फायर वॉचर की मौत, विभाग के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा

रैबार डेस्क:  गर्मी का सितम चढ़ते ही जंगलों में आगकी घटनाएं अचानक से बढ़ गई हैं। चमोली जिले में भी बदरनीताथ रेंज और नारायणबगड़ में जंगल धूं धूं कर जल रहे हैं। इस बीच आग बुझाने के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई है। बद्रीनाथ वन प्रभाग के बिरही क्षेत्र में जंगल की आग बुझाने गए एक फायर वॉचर की चट्टान से गिरकर मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

जानकारी के मुताबिक बदरीनाथ वन प्रभाग में भी जंगल जल रहे हैं। बिरही क्षेत्र में 20 मई की शाम वन विभाग की टीम जंगल की आग बुझाने पहुंची थी। आग बुझाने के दौरान फायर वॉचर 43 वर्षीय राजेंद्र सिंह पुत्र नंदन सिंह निवासी पाखी-जलग्वाड़, बदरीनाथ चट्टान से गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और परिजन मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि राजेंद्र सिंह पिछले 8 वर्षों से वन विभाग के साथ फायर वॉचर के रूप में कार्य कर रहे थे और परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।

इस घटना से परिजनों के साथ साथ स्थानीय लोगों में विभाग की लापरवाही पर भारी आक्रोश है। नाराज लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों का घेराव करते हुए मृतक के परिवार को मुआवजा और पत्नी को नौकरी देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग आग पर नियंत्रण पाने में नाकाम साबित हो रहा है। सरकार ने फायर वॉचर तो नियुक्त किए हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए हैं। भीषण जंगल की आग के बीच वन कर्मी और फायर वॉचर बिना संसाधनों के जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।

बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी सर्वेश दुबे का कहना है कि, फायर वॉचर स्थायी कर्मचारी नहीं होते और उन्हें केवल तीन महीने के फायर सीजन के लिए तैनात किया जाता है। विभाग की ओर से उनका जोखिम बीमा कराया जाता है। दुर्घटना की स्थिति में बीमा के तहत लगभग 10 लाख रुपए तक की सहायता राशि दी जा सकती है।

पौड़ी-नारायणबगड़ में भी धधक रहे जंगल

चमोली जिले के ही नारायणबगड़ क्षेत्र के पश्चिमी पिंडर रेंज- बद्रीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत लगी भीषण आग ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किया जा सकता हैं। लेगुना गांव के ठीक नीचे वन भूमि क्षेत्र में लगी आग से हजारों की संख्या में शिशु पौधे जलकर राख हो गए, जबकि लाखों रुपये की वन संपदा भी स्वाहा हो गई। जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में सिविल वन भूमि क्षेत्र में लगभग 5500 शिशु पौधों का रोपण किया गया था, लेकिन आग की चपेट में आने से ये सभी पौधे पूरी तरह नष्ट हो गए।

उधर पौड़ी के बुआखाल, पौड़ी–देवप्रयाग मोटर मार्ग पर सबदरखाल के समीप जंगलों में भीषण आग देखने को मिली। सड़क से सटे जंगलों के साथ-साथ ऊंचाई पर स्थित वन क्षेत्र भी आग की चपेट में आ गए। आग इतनी विकराल थी कि दूर-दूर तक लपटें दिखाई दे रही थीं. पूरा क्षेत्र धुएं से भर गया। जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं के चलते वन्य जीव भी प्रभावित हो रहे हैं। पानी और सुरक्षित स्थान की तलाश में जंगली जानवर जंगलों से बाहर निकलने को मजबूर हो रहे हैं,जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ सकता है।

पहले राहत अब आफत

अमूमन फायर सीजन 15 फरवरी के बाद शुरू होता है। इस साल मई की शुरुआत तक बारिश होने से जंगलों में मनी बनी रही जिससे वनाग्नि पर काफी हद तक नियंत्रण बना रहा। लेकिन पारा चढ़ते ही जंगल तेजी से आग की चपेट में आ रहे हैं। भीषण गर्मी, तपती धूप और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे आग बुझाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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